यह तो सभी जानते हैं कि आम एक फल है जिसका पेड़ काफी बड़ा होता है और सदाबहार होता है जिसमें गर्मियों के मौसम में फल लगते हैं जो पहले हरे होते हैं और बाद में मीठे और पीले हो जाते हैं। हरे आम की चटनी बनती है , हरे आम का पन्ना बनता है जो लू के दिनो में शरीर की रक्षा करता है। हरे आम का अचार भी बनता है । पका हुआ आम बहुत मीठा और स्वादिष्ट होता है। आम पूरे भारतवर्ष में होते हैं।
पर आम शब्द का प्रयोग फल के अलावा और भी तरह से होता है ,कई तरह से । कहावतों में पॉलीटिकल पार्टी में और आयुर्वेद में इत्यादि ।
बचपन में स्कूल के लिए पैदल जाते वक्त एक शॉर्टकट लेता था मैं क्योंकि सीधे सड़क से जाने में स्कूल बहुत दूर पड़ता था। शॉर्टकट एक पगडंडी थी जिसके दोनों तरफ एक बोर्ड लगा रहता था जिस पर लिखा था "आम रास्ता नहीं है". यह आम शब्द का दूसरा उपयोग देखा मतलब की रास्ता प्राइवेट है सब लोगों के इस्तेमाल का नहीं है.
फिर स्कूल में ही एक कहावत पढ़ी कि "आम
के आम गुठली के दाम" । यह आम शब्द का तीसरा प्रयोग था। मुहावरे के रूप में ।
करीब 10-12 साल पहले भारत में लोगों ने एक नई पार्टी बना दी आम शब्द के ऊपर "आम आदमी पार्टी"। यह आम खाने वाले मनुष्य की पार्टी नही थी बल्कि एक पॉलीटिकल पार्टी थी।
आयुर्वेद में 'आम' (जिसका मूल संस्कृत शब्द 'अमा' है) का अर्थ कोई फल नहीं, बल्कि "विषाक्त तत्व" (Toxins) होता है। आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में होने वाली अधिकांश बीमारियों की जड़ यही 'आम दोष' होता है।
हिंदी भाषा में कई ऐसे शब्द हैं जिनके एक से अधिक मतलब होते हैं। मिसाल के तौर पर कनक
का मतलब सोना भी होता है और गेहूं भी। कल का अर्थ बीता हुआ दिन भी होता है, आने वाला दिन भी होता है और मशीन भी होता है जैसे कल पुर्जे। इसी तरह तीर का मतलब भी एक तो तीर धनुष वाले तीर से होता है और दूसरा किनारे से, जैसे "मेरा गांव गंगा के तीर है"।
शब्दों का इस्तेमाल बहुत सोच कर करना चाहिए खास कर तब जब आप किसी दूसरे भाषाई क्षेत्र में हो जहां उस शब्द का कुछ और मतलब हो सकता है जो आपके लिए परेशानी कर सकता है। मिसाल के तौर पर हिंदी भाषिक क्षेत्र में वासना का अर्थ कामवासना से होता है पर मलयालम में इसका अर्थ खुशबू होता है।
अब सोचिए कि अगर केरल का रहने वाला कोई मनुष्य उत्तर प्रदेश में आकर हिंदी बोलता है और एक युवा महिला से कहता है कि आपके शरीर से बहुत वासना आ रही है तो उसका क्या हाल होने वाला है।
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